ईद-उल-अजहा, जिसे आम तौर पर बकरीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक बहुत अहम त्योहार है। यह त्योहार कुरबानी, अल्लाह की रज़ा और इंसानियत की मिसाल के तौर पर मनाया जाता है। यह ईद-उल-फित्र के करीब दो महीने बाद मनाई जाती है और इस्लामी कैलेंडर के आख़िरी महीने ज़िल-हिज्जा की 10 तारीख़ को आती है।
ईद-उल-अजहा की शुरुआत कैसे हुई?
ईद-उल-अजहा की शुरुआत हज़रत इब्राहीम (अलैहि सलाम) की कुर्बानी से जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि अल्लाह ने इब्राहीम (अ.स.) की वफादारी की आज़माइश ली थी और उन्हें अपने सबसे प्यारे बेटे, हज़रत इस्माईल (अ.स.) को कुर्बान करने का हुक्म दिया था।
इब्राहीम (अ.स.) ने अल्लाह के हुक्म को मानते हुए बेटे की कुर्बानी के लिए तैयार हो गए। लेकिन जैसे ही उन्होंने कुर्बानी दी, अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक दुम्बा (मेंढा) भेज दिया। इसी वाकये की याद में मुसलमान आज भी कुर्बानी करते हैं।
कुर्बानी का मक़सद क्या है?
कुर्बानी सिर्फ जानवर की बलि देना नहीं है, बल्कि इसका असली मक़सद है:
अल्लाह की रज़ा के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज़ कुर्बान करना
अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करना
ग़रीबों और ज़रूरतमंदों तक नेमतें पहुँचाना
कुर्बानी का गोश्त तीन हिस्सों में बाँटा जाता है:
एक हिस्सा गरीबों को
एक हिस्सा रिश्तेदारों को
और तीसरा हिस्सा अपने घर वालों के लिए रखा जाता है
नमाज़ और समाज में भाईचारा
ईद-उल-अजहा की सुबह, मुसलमान नमाज़ अदा करते हैं और उसके बाद ख़ुतबा (धार्मिक भाषण) सुना जाता है। इस दिन की नमाज़ मस्जिद या ईदगाह में पढ़ी जाती है।
लोग एक-दूसरे को ईद मुबारक कहते हैं, गले मिलते हैं और मिलकर खाना खाते हैं। यह दिन आपसी मोहब्बत और भाईचारे को मज़बूत करता है।
नगीना में ईद की रौनक
नगीना शहर में ईद-उल-अजहा की खास तैयारियाँ चल रही हैं। लोग जानवरों की खरीदारी कर रहे हैं, बाज़ारों में भीड़ है और घरों में पकवानों की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं।
प्रशासन की ओर से सफ़ाई और सुरक्षा के इंतज़ाम किए गए हैं ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से मनाया जा सके।
इस ईद पर क्या करें?
कुर्बानी के दौरान साफ़-सफाई का ध्यान रखें
जानवरों के साथ रहमदिली से पेश आएँ
गोश्त को सही तरीके से तक़सीम करें
ज़रूरतमंदों को ज़रूर शामिल करें
मोहल्ले और शहर की सफ़ाई का ख़याल रखें
निष्कर्ष
ईद-उल-अजहा सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि इंसानियत, ईमानदारी और अल्लाह की रज़ा की एक मिसाल है। इस दिन हम सबको चाहिए कि हम अपने दिलों से भी घमंड, नफरत और बुराई की कुर्बानी दें।




